कभी ख्वाव मे, या ख्याल मे,
युं ही आप हमसे मिला करे।
ये चमन है आपका,
यु फुल बन के खिला करे।।
हम आप कि हर शैं को,
नगमों की तरह गाते है।
जो साथ गुजारे है लम्हें,
यादो मे मेरे आते है।।
कभी जिन्दगी के सवाल पे,
कोई तो मुझसे गिला करे।
कभी ख्वाव मे, या ख्याल मे,
युं ही आप हमसे मिला करे।।
गुलशन की शाख-शाख पर,
लिख दी हमने ये दास्तान।
तु ही मेरी मन्जिल है,
तु ही है मेरा रास्ता॥
अब और ना रोको मुझको,
चलो प्यार का सिलसिला करे।
कभी ख्वाव मे, या ख्याल मे,
युं ही आप हमसे मिला करे।।
वो सुहनी शाम सा चेहरा,
वो रात सा तेरा आन्चल।
जैसे चान्दनी का चान्द हो,
और घिर आये काले बादल॥
इन प्यारी -प्यारी यादों का,
मंजर कब तक गिना करे।
कभी ख्वाव मे, या ख्याल मे,
युं ही आप हमसे मिला करे।।
वो मुस्कुराता सा चेहरा,
वो रुप स्रिंगार का दर्पण।
वो पर्तिपल प्यार की बांते,
वो भाव जगत का अर्पण॥
इस सरस सलिल जीवन को,
कभी अपनी लय से सिला करे।
कभी ख्वाव मे, या ख्याल मे,
युं ही आप हमसे मिला करे।
मिथिलेश राय
युं ही आप हमसे मिला करे।
ये चमन है आपका,
यु फुल बन के खिला करे।।
हम आप कि हर शैं को,
नगमों की तरह गाते है।
जो साथ गुजारे है लम्हें,
यादो मे मेरे आते है।।
कभी जिन्दगी के सवाल पे,
कोई तो मुझसे गिला करे।
कभी ख्वाव मे, या ख्याल मे,
युं ही आप हमसे मिला करे।।
गुलशन की शाख-शाख पर,
लिख दी हमने ये दास्तान।
तु ही मेरी मन्जिल है,
तु ही है मेरा रास्ता॥
अब और ना रोको मुझको,
चलो प्यार का सिलसिला करे।
कभी ख्वाव मे, या ख्याल मे,
युं ही आप हमसे मिला करे।।
वो सुहनी शाम सा चेहरा,
वो रात सा तेरा आन्चल।
जैसे चान्दनी का चान्द हो,
और घिर आये काले बादल॥
इन प्यारी -प्यारी यादों का,
मंजर कब तक गिना करे।
कभी ख्वाव मे, या ख्याल मे,
युं ही आप हमसे मिला करे।।
वो मुस्कुराता सा चेहरा,
वो रुप स्रिंगार का दर्पण।
वो पर्तिपल प्यार की बांते,
वो भाव जगत का अर्पण॥
इस सरस सलिल जीवन को,
कभी अपनी लय से सिला करे।
कभी ख्वाव मे, या ख्याल मे,
युं ही आप हमसे मिला करे।
मिथिलेश राय
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